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पाँच नोट्स, एक रास्ता
अगर ये तुम्हारी पहली मुलाक़ात है, तो पुराने सारे नोट्स से मत शुरू करो। इन पाँच नोट्स को इसी क्रम में पढ़ो। ये एक ऐसे ख़याल से शुरू होते हैं जिसे थामा जा सकता है, और उस ब्रह्मांडीय समय तक जाते हैं जिसे तुम पार कर सकते हो।
नोटबुक की असली आदत से शुरू करो: एक पुराने ख़याल और एक नई खोज को मिलाओ, बिना किसी एक को जबरन सही ठहराए।
खालीपन का एक निशान अनंत का दरवाज़ा कैसे बना, और क्यों ये दोनों हमेशा से एक ही कमरा थे।
ये नोट खोलोफिर पूरे और आख़िरी जवाब की ज़िद थोड़ी ढीली करो। यह सीधा-सादा लेख आगे के पूरे रास्ते का नक़्शा समझाता है।
ज्ञान अज्ञात को छोटा नहीं करता, वह अज्ञात को एक किनारा देता है।
ये नोट खोलोफिर एक बार में सच का एक पहलू छुओ। यह छोटा-सा खेल अनेक नज़रियों को समझाता नहीं, तुम्हें खुद महसूस कराता है।
छह अंधे विद्वान, एक हाथी, और विनम्रता की सबसे पुरानी सीख, जिसे फ़िज़िसिस्ट के दौर के लिए फिर से सुनाया गया है।
ये नोट खोलोअब ध्यान के दो मतलबों से खेलो: मशीन वज़न बाँटती है, और मन भटककर वापस आना सीखता है।
एक ही शब्द मशीन के वेट्स और ध्यान करने वाले के लौटने, दोनों को नाम देता है, लेकिन इनमें से सिर्फ़ एक ही किसी को दिया जा सकता है।
ये नोट खोलोअंत एक परमाणु के साथ ब्रह्मांड का समय पार करके करो। सफ़र चलाओ या खुद आगे बढ़ाओ; बहुत बड़ा समय पहली बार महसूस होता है।
पहली रोशनी से एक इंसानी ज़िंदगी तक और फिर वापस अँधेरे में जाते एक परमाणु का पीछा कीजिए। प्ले दबाइए, या तेरह अरब सालों की टाइमलाइन खुद आगे-पीछे खिसकाइए।
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