पूरा, अब भी अंधेरे में
एक अंधेरा कमरा। छह जानकार, आँखों पे पट्टी। उनके बीच में, कुछ बहुत बड़ा और साँस लेता हुआ।
सुनाने वाला
“सबसे एक ही सवाल पूछा गया। तुम्हारे सामने ये क्या है?”
एक झूठे पूरे की छह सच्ची ख़बरें। हाथी कभी ग़लत नहीं था। ग़लत सिर्फ़ हमारा यक़ीन था।